कोरोना: 50 लाख के पार हुए मामले, यही रफ्तार रही तो दिवाली तक दोगुने होने की आशंका

भारत में मंगलवार को कोरोना महामारी के मामले 50 लाख के पार चले गए हैं। हर दिन देश में कोविड-19 के 80,000-90,000 मामले सामने आ रहे हैं। जानकारों को डर है कि अगर यही ट्रेंड बना रहा तो 14 नवंबर यानि कि दिवाली के दिन ये मामले दोगुने हो सकते हैं। 

कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अगर रोजाना सामने आ रहे मामलों में गिरावट नहीं आई तो अगले 60 दिनों में देश में कोरोना के मामले एक करोड़ को पार कर सकते हैं। बता दें कि देश में पहली बार कोरोना का मामला 30 जनवरी को सामने आया था और तब से लेकर अब तक 228 दिनों में कोरोना के मामले 50 लाख के पार चले गए हैं।
भारत में बुधवार को कोरोना के सक्रिय मामले दस लाख पहुंच जाएंगे। वहीं अकेले महाराष्ट्र राज्य से कोविड-19 मामलों की सबसे ज्यादा संख्या है, ये संख्या 19.82 फीसदी है। कोरोना को लेकर एक बात सकारात्मक है कि यहां महामारी से ठीक होने वाले मरीजों की दर ज्यादा है मौजूदा समय में कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की दर 78.42 फीसदी हो गई है और मृत्यु दर 1.63 फीसदी है। पांच राज्यों में कुल सक्रिय मरीजों के 60 फीसदी मामले हैं। इनमें से महाराष्ट्र के 29.3 फीसदी, कर्नाटक के 9.9 फीसदी, आंध्र प्रदेश के 9.4 फीसदी, उत्तर प्रदेश के 6.8 फीसदी और तमिलनाडु के 4.7 फीसदी मामले शामिल हैं।

Coronavirus In Uttar Pradesh (up) Live Updates News In Hindi: Covid 19 New  Cases And Latest Update - Coronavirus In Up Live Updates: आगरा में मिले  सबसे अधिक कोरोना मरीज, प्रदेश में

अगर हाल ही के हफ्तों की बात करें तो तीन हफ्ते में दुनिया में सबसे ज्यादा 21.8 फीसदी मामले भारत में मिले। वहीं एक हफ्ते में भी दुनिया के 36.9 फीसदी कोरोना के नए मरीज भारत में ही आए हैं। रोजाना सामने आ रहे कोरोना के मामलों में भारत ने अमेरिका को पछाड़ दिया है।  

तीन महीने में अमेरिका में 21.4 फीसदी कोरोना के नए मामले सामने आए लेकिन भारत में इसकी संख्या 21.8 फीसदी है, वहां ब्राजील में 16.4 फीसदी और बाकी दुनिया में 26.4 फीसदी है। इसके अलावा बात करें पिछले एक हफ्ते की भारत में अमेरिका से दोगुने मामले सामने आए हैं पिछले एक हफ्ते में अमेरिका नए मामलों की दर 15.6 फीसदी है जबकि भारत में यह दर 30.8 फीसदी है। पिछले एक हफ्ते में भारत में सबसे ज्यादा कोविड-19 के मामले सामने आए हैं। पिछले एक हफ्ते में अमेरिका में कोरोना के 13.7 फीसदी मामले सामने आए तो वहीं भारत में ये आंकड़ा 36.9 फीसदी है।

कोरोना वायरस से खौफ खा रही दुनिया, हैंड सैनेटाइजर और मास्क की कमी, कीमत में  भी बढ़ोत्तरी | Crona virus news scared world, lack of hand sanitizer and  mask, price rise kps

हालांकि पूरी दुनिया में कोरोना के कुल मामलों में भारत का योगदान देखेंगे तो ये महज 16.91 फीसदी है जबकि अमेरिका इसमें भारत से आगे है। अमेरिका में यह संख्या 22.82 फीसदी है। ऐसा माना जा रहा है कि आज दुनिया में कोरोना के मामले तीन करोड़ हो जाएंगे। 

अमेरिकी के सीडीसी के अनुसार, 1918-1919 में इंफ्लूएंजा से दुनिया में 50 करोड़ लोग संक्रमित हुए थे। इसका मतलब यह है कि उस समय दुनिया की एक तिहाई आबादी इस बीमारी से संक्रमित हो गई थी। बता दें कि पहले कोरोना के मामले एक करोड़ होने में 156 दिन लगे थे लेकिन इसके बाद दो करोड़ होने में मात्र 44 दिन लगे

Covid-19:नाक के जरिए टीके की खुराक देने पर परीक्षण

there is no risk of coronavirus infection once antibodies are made scientists confirm for first time

ब्रिटिश वैज्ञानिक अब यह अध्ययन कर रहे हैं कि क्या संक्रमण की शुरुआती जगह यानी नाक के जरिए कोरोना वायरस के टीके की खुराक इंजेक्शन से ज्यादा प्रभावशाली हो सकती है। इम्पीरियल कॉलेज लंदन और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने सोमवार को एक बयान में कहा कि 30 लोगों को शामिल कर टीकों का परीक्षण किया जाएगा।

शोध का नेतृत्व कर रहे और इंपीरियल कॉलेज लंदन के डॉ क्रिस चियु ने कहा, हमारे पास सबूत है कि एक नेजल (नाक) स्प्रे के माध्यम से इन्फ्लूएंजा का टीके देने से फ्लू से लड़ने और इस बीमारी के संचरण को कम करने में मदद मिलती है।

कोविड-19 के मामले में भी यह नेजल स्प्रे असरदार साबित हो सकता है। हमारे लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि क्या इंजेक्शन की तुलना में नाक के जरिए दी गई टीके की खुराक प्रभावी साबित हो सकती है। हम यह जानने की कोशिश में लगे हैं कि नेजल स्प्रे के माध्यम से टीका लगाने से नोवेल कोरोना वायरस से जंग जीती जा सकती है या नहीं। वर्तमान में यह अध्ययन 18 से 55 वर्ष की आयु के प्रतिभागियों पर किया जा रहा है और आने वाले हफ्तों में लंदन में लोगों का टीकाकरण शुरू करने की उम्मीद है।

Serum Institute Gets Nod To Resume Oxford COVID-19 Vaccine Trial In India

पिछले अध्ययनों से पता चला है कि इनहेलेशन यानी नाक के द्वारा वितरित टीकों को इंजेक्शन की तुलना में कम खुराक की आवश्यकता होती है, जिससे सीमित आपूर्ति में मदद मिल सकती है। आमतौर पर वैक्सीन शरीर के ऊपरी हिस्सों में लगाई जाती है लेकिन हर वायरस की अपनी अलग प्रवृत्ति होती है और कोरोना वायरस भी पूर्व के वायरसों से बिल्कुल अलग है। इसके बचाव और तुरंत असर के लिए अगर नाक के जरिए वैक्सीन अंदर जाएगी तो सीधे इस वायरस पर हमला करेगी और उसे खत्म करेगी। इसी उम्मीद के साथ यह परीक्षण किया जा रहा है।

शोधकर्ता रॉबिन शटॉक ने कहा कि टीका होना ही पर्याप्त नहीं है पर उसे लगाने की सही तरीका पता होना उससे भी ज्यादा आवश्यक है। अपने इस परीक्षण से हम यह बताने में सक्षम होंगे कि कोरोना से संक्रमित मरीज को टीका देने की सही विधि क्या है

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *