सरकार की लिस्ट से हटा मास्क और सनीताजिएर

आज एक बहुत बड़ा फैसला लिया गए जिसमे सरकार की ओर से सैनेटाइजर और मास्क को जरूरी सामान की लिस्ट से हटाने का फैसला लिया गया है. जिसपर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं.कयोकि आज देश मे कॅरोना के 7 लाख सा भी अधिक मामले है और हर रोज लगभाग 20000k मामले सामने आ रहे है ऐसा मे देश में कोरोना वायरस की बेकाबू होती रफ्तार के बीच मास्क और सैनेटाइज़र को ज़रूरी सामान की लिस्ट से हटा दिया गया है. हालत को देख़ते हुए इस फैसले पर सवाल खड़े हो रहे हैं. सैनेटाइज़र और मास्क बनाने वाली कंपनियों ने केंद्र सरकार से ऐसा ना करने की अपील की थी, लेकिन केंद्र सरकार ने इन अपील पर कोई धयान नहीं दिया.

एक जुलाई को सरकार की ओर से नई लिस्ट जारी की है , जिसमें सैनेटाइजर और मास्क शामिल नहीं था.इस लिस्ट को दे ख़ कर सभ हैरान रहे गए | AIMED ने सरकार से 30 जून को ही कहा था कि जैसे ही अनलॉक शुरू हुआ है और लोग बाहर निकलने लगे हैं, ऐसे में मास्क और सैनेटाइजर की डिमांड बढ़ी है.

AiMeD के फॉरम कॉर्डिनेटर राजीव नाथ ने को बताया कि हमने इनके बढ़ते दामों पर कैप लगाने की भी बात की थी. लेकिन अब जब इन्हें जरूरी सामान की लिस्ट से हटाया गया है, तो फिर मास्क और सैनेटाइजर के दाम बढ़ सकते हैं. लेकिन अगले एक साल तक 10 फीसदी से अधिक दाम नहीं बढ़ाया जा सकता है.

हवा में ही फैल रहा कोरोना वायरस

WHO लिखे एक पत्र में बताया था कि कोरोना एक एयरबॉर्न वायरस है, जो हवा में भी फैल सकता है. वैज्ञानिकों ने कुछ साक्ष्यों पर भी प्रकाश डाला है जो बताते हैं कि वायरस के नन्हे पार्टिकल्स हवा में रहकर लोगों को संक्रमित कर रहे हैं. WHO ने भी तथ्यों पर आधारित इस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है.कोविड-19 महामारी से जुड़ी टेक्निकल लीड डॉक्टर मारिया वा करखोव ने कहा, ‘कोरोना वायरस के हवा में होने के सबूत तो मिले हैं, लेकिन इस बारे में अभी स्पष्ट कुछ नहीं कहा जा सकता है|WHO के 239 वैज्ञानिकों ने इस बात के सबूत दिए हैं कि न्यूक्ली ड्रॉपलेट  न सिर्फ हवा में 1 मीटर से ज्यादा दूरी तक फैलता है ट्रवेल करते है , बल्कि ज्यादा देर के लिए भी खतरा पैदा करता है. अगर वैज्ञानिकों के इस तर्क में सच्चाई है तो वाकई ये वायरस हमारी सोच से भी ज्यादा खतरनाक है.

भारत की कोवैक्सीन का ह्यूमन(human ) ट्रायल जल्द होगा

कोविड-19 की पहली देसी वैक्सीन तैयार कर ली गई है जिसका नाम कोवैक्सीनइसे भारत बायोटेक और ICMR ने मिलकर बनाया है|कंपनी को सरकार की ओर से पहले और दूसरे चरण  को रेगुलेट करने की मंजूरी मिली है.|कंपनी क्लिनिकल ट्रायल में लोगों पर  वैक्सीन का टेस्ट करेगी  है, ताकि ये पता लगाया जा सके कि ये वैक्सीन कितनी सुरक्षित और असरदार है. आमतौर पर इस तरह की प्रक्रिया में दस साल लग जाते हैं

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